Kanpur News | TrendingNews.in |साइबर सिक्योरिटी कोर्स – भारत में साइबर हमलों और डिजिटल अपराधों की बढ़ती घटनाओं के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर ने एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी (B Cyber) नामक नया स्नातक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। यह कोर्स कई मायनों में खास है क्योंकि इसमें प्रवेश के लिए पारंपरिक IIT एडमिशन प्रक्रिया से अलग रास्ता अपनाया जाएगा। छात्रों का चयन केवल परीक्षा के अंकों के आधार पर नहीं बल्कि उनकी वास्तविक साइबर सुरक्षा क्षमताओं, हैकिंग स्किल्स और हैकाथॉन प्रदर्शन के आधार पर भी किया जाएगा।
यह IIT सिस्टम का पहला ऐसा समर्पित अंडरग्रेजुएट साइबर सुरक्षा कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश में विश्वस्तरीय साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करना है।

साइबर सिक्योरिटी कोर्स क्या है नया B Cyber कार्यक्रम?
IIT कानपुर द्वारा शुरू किया जा रहा यह चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करेगा। डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट आधारित सेवाओं के तेजी से विस्तार के कारण साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी जरूरत को देखते हुए यह कोर्स डिजाइन किया गया है।
संस्थान के अनुसार इस कार्यक्रम में शुरुआती चरण में लगभग 60 सीटें उपलब्ध होंगी। छात्रों को नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, डिजिटल फॉरेंसिक, क्रिप्टोग्राफी, साइबर डिफेंस और साइबर रिस्क मैनेजमेंट जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। यह साइबर सिक्योरिटी कोर्स एथिकल हैकिंग और डिजिटल सुरक्षा पर केंद्रित होगा।
JEE Advanced नहीं, स्किल्स होंगी सबसे अहम
साइबर सिक्योरिटी कोर्स IIT में सबसे बड़ी बात यह है कि इस कोर्स में प्रवेश के लिए JEE Advanced स्कोर अनिवार्य नहीं होगा। IIT कानपुर ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया में छात्रों की साइबर सुरक्षा संबंधी क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रवेश प्रक्रिया में निम्न चरण शामिल हो सकते हैं:
- JEE Main देने वाले छात्र आवेदन कर सकेंगे।
- उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी।
- साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों और उपलब्धियों का मूल्यांकन होगा।
- चयनित छात्रों को हैकाथॉन या विशेष तकनीकी चुनौतियों में भाग लेना होगा।
- अंतिम चयन प्रदर्शन और योग्यता के आधार पर किया जाएगा।
इस मॉडल का उद्देश्य केवल अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को नहीं बल्कि वास्तविक तकनीकी प्रतिभा रखने वाले युवाओं को अवसर देना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में साइबर अपराधों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकारी संस्थानों, बैंकों, कंपनियों और आम नागरिकों को साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की भारी कमी महसूस की जा रही है।
IIT कानपुर का मानना है कि साइबर सिक्योरिटी कोर्स साइबर सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है जहां केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। यहां वास्तविक समस्याओं को हल करने की क्षमता, सुरक्षा खामियों को पहचानने का कौशल और प्रैक्टिकल अनुभव अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण संस्थान ने पारंपरिक प्रवेश मॉडल से हटकर स्किल-आधारित चयन प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है।
हैकाथॉन बनेगा एडमिशन का अहम हिस्सा
IIT कानपुर लंबे समय से साइबर सुरक्षा क्षेत्र में विभिन्न हैकाथॉन और प्रतियोगिताओं का आयोजन करता रहा है। संस्थान के C3iHub द्वारा आयोजित HACK IITK देश के प्रमुख साइबर सुरक्षा हैकाथॉन में गिना जाता है। इसमें प्रतिभागियों को वास्तविक साइबर चुनौतियों को हल करना होता है। IIT कानपुर का नया साइबर सिक्योरिटी कोर्स छात्रों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हैकाथॉन छात्रों की समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मक सोच और तकनीकी दक्षता को परखने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसलिए नए B Cyber कार्यक्रम में भी हैकाथॉन आधारित मूल्यांकन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस साइबर सिक्योरिटी कोर्स में हैकाथॉन के जरिए चयन किया जाएगा।
एथिकल हैकर्स को मिलेगा बड़ा मंच
हाल ही में एक युवा एथिकल हैकर द्वारा शैक्षणिक पोर्टल में सुरक्षा खामियां उजागर करने के बाद उसे IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा इनोवेशन हब से जुड़ने का अवसर मिला था। इस घटना ने यह दिखाया कि संस्थान केवल अकादमिक अंकों को नहीं बल्कि वास्तविक तकनीकी प्रतिभा को भी महत्व देता है।
नया साइबर सुरक्षा कार्यक्रम भी इसी सोच को आगे बढ़ाता है। इससे उन छात्रों को लाभ मिलेगा जो बचपन से कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी, बग बाउंटी और एथिकल हैकिंग में रुचि रखते हैं लेकिन पारंपरिक परीक्षा प्रणाली में हमेशा शीर्ष रैंक नहीं ला पाते।
छात्रों को क्या होगा फायदा?
इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्रों के लिए कई आकर्षक करियर विकल्प उपलब्ध होंगे। इनमें शामिल हैं:
- साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट
- सिक्योरिटी इंजीनियर
- डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट
- एथिकल हैकर
- साइबर रिस्क कंसल्टेंट
- क्लाउड सिक्योरिटी विशेषज्ञ
- साइबर डिफेंस रिसर्चर
- सरकारी सुरक्षा एजेंसियों में विशेषज्ञ पद
साइबर सुरक्षा क्षेत्र में वर्तमान समय में लाखों रुपये के वार्षिक पैकेज वाली नौकरियां उपलब्ध हैं और आने वाले वर्षों में इनकी मांग और बढ़ने की संभावना है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। UPI, डिजिटल बैंकिंग, ई-गवर्नेंस, AI और क्लाउड सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है। ऐसे में प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा पेशेवरों की नई पीढ़ी तैयार करना बेहद जरूरी है।
IIT कानपुर की यह पहल न केवल छात्रों को नए अवसर प्रदान करेगी बल्कि देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत बनाने में योगदान देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में अन्य शैक्षणिक संस्थान भी इसी तरह के स्किल-आधारित कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। छात्रों को साइबर सिक्योरिटी कोर्स के दौरान वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा।
आवेदन कब और कैसे करें?
IIT कानपुर के अनुसार यह कार्यक्रम जुलाई 2026 से शुरू होगा। आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, चयन मानदंड और हैकाथॉन संबंधी विस्तृत जानकारी संस्थान द्वारा जल्द जारी की जाएगी। इच्छुक छात्र IIT कानपुर की आधिकारिक वेबसाइट और संस्थान की प्रवेश संबंधी घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।
निष्कर्ष
IIT कानपुर का नया बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी कार्यक्रम भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। यह पहल दिखाती है कि भविष्य की शिक्षा केवल परीक्षा अंकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तविक कौशल, नवाचार और तकनीकी दक्षता को भी समान महत्व मिलेगा। JEE Main देने वाले और साइबर सुरक्षा में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। IIT कानपुर का साइबर सिक्योरिटी कोर्स देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में नया बदलाव माना जा रहा है।
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