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होर्मुज विवाद में नया मोड़, ईरान ने कहा- ट्रंप की वजह से नहीं बन सकी सहमति

On: July 13, 2026 5:35 AM
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होर्मुज संकट पर ईरान और ट्रंप के बीच बढ़ता तनाव
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Trending News : मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान के बीच ओमान की राजधानी मस्कट के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें फिलहाल सफल नहीं हो सकी हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और दबाव की रणनीति ने वार्ता के माहौल को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि ट्रंप, ओमान पर दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाना चाहते हैं।

होर्मुज संकट पर ईरान और ट्रंप के बीच बढ़ता तनाव
होर्मुज संकट को लेकर ईरान ने ट्रंप पर ओमान की मध्यस्थता को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

क्या है पूरा मामला?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

हाल के दिनों में ओमान ने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की। हालांकि बातचीत के दौरान कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।

ईरान का आरोप

ईरानी पक्ष का कहना है कि ट्रंप के हालिया बयानों ने बातचीत के माहौल को नुकसान पहुंचाया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका, ओमान की मध्यस्थता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और मस्कट पर दबाव बनाकर अपनी रणनीति लागू कराना चाहता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यदि वार्ता को सफल बनाना है तो सभी पक्षों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के बातचीत करनी होगी।

अमेरिका की क्या है रणनीति?

अमेरिका लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और यहां जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस मार्ग का खुला रहना बेहद जरूरी है।

क्यों अहम है ओमान?

ओमान लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच संवाद स्थापित कराने की भूमिका निभाता रहा है। दोनों देशों के बीच कई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ताएं मस्कट में आयोजित होती रही हैं। इसी वजह से जब भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ता है, ओमान को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में देखा जाता है।

दुनिया की नजरें होर्मुज पर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद और गहराता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।

आगे क्या?

फिलहाल ओमान की मध्यस्थता से कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्ष फिर से बातचीत की मेज पर लौटते हैं, तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं यदि बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

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Rajkumar vishwakarma

Rajkumar Vishwakarma TrendingNews.in के Founder, Editor और Content Publisher हैं। उन्हें समाचार, तकनीक, व्यापार, ऑटोमोबाइल, सरकारी योजनाओं और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि है। वे पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और समय पर जानकारी पहुँचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से समाचार और विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। TrendingNews.in पर प्रकाशित सभी समाचार संपादकीय दिशानिर्देशों और तथ्य-जांच प्रक्रिया का पालन करते हैं।

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